पेरेंटिंग (Parenting ) एक आसान काम नहीं है, खासकर जब लॉक डाउन का समय चल रहा हो और सारे बच्चे घर में हो l लॉकडाउन के समय घर का सारा काम जिम्मेदारियां, वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) और बच्चों को lockdown me संभालना, यह बड़ी-बड़ी चुनौतियां हमारे सामने आकर खड़ी हो जाती हैं l

इस पोस्ट मैं आपसे 3 तरीके शेयर करुंगा, जिससे हम बच्चों को घर में व्यस्त रख सकते हैं l

1. घर की जिम्मेदारियां बांटना – lockdown

बच्चों को सामान्य तौर पर स्कूल जाने, परीक्षा की तैयारी करने, खेलने, टीवी/ मोबाइल देखने और होमवर्क करने की आदत है। इन दिनों हम अपने बच्चों से घर के कामों में मदद लेने के लिए उनकी जिम्मेदारियां तय करें जैसे:

-उन्हें अपना कमरा साफ करने के लिए बोले।

-रसोईघर व्यवस्थित करने में मदद मांगे।

-साफ सफाई करने में उनसे सहयोग मांगे।

यदि उन्होंने खाना खाते समय खाना गिराया है, तो उन्हें खुद ही उठाने के लिए बोले और अपनी थालियों को रसोई के सिंक तक ले जाने के लिए भी कहें। अब आप कहेंगे कि यह सब बातें तो हमें भी पता है कई चीजें हम जानते तो है लेकिन उसे मानते नहीं हैं।

उदाहरण : यदि हम न्यूज़ चैनल पर खबर देखते हैं कि जापान के बच्चे बहुत अनुशासित हैं l वह स्कूल में साफ सफाई और घर में साफ सफाई में मदद करते हैं और यह वीडियो हम अपने बच्चों को दिखाते भी हैं, और उनको कहते हैं कि देखा यह कितने जिम्मेदार बच्चे हैं ! और यदि अपने बच्चों से काम करवाने की जब विचार मन में आता है, तो हमारे मन में दूसरा विचार आता है कि हमने अपनी जिंदगी में बहुत संघर्ष किया है, हम अपने बच्चों से काम करवाएंगे ? हमारे बच्चे आराम से रहना चाहिए। लेकिन सोचिए क्या यह विचार आना सही है? lockdown

शिक्षक (टीचर) होने के नाते अभी हम अपने विचार आपसे शेयर करें तो सबसे बड़ी चिंता हमें इसी बात की रहती है कि बच्चों में जिम्मेदारी का अभाव दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। हम यह सोच रहे हैं कि उन्हें जो शिक्षा स्कूल में दी जा रही है, क्या सही में वह उनके काम आएगी ?

ऐसा करने से बच्चे बड़े होने पर केवल अपने अधिकारों की बात करते हैं,जिम्मेदारियों की बात नहीं करते हैं और आजकल देखने में भी यही आ रहा है। हमारे देश के अधिकतर युवा, धरना प्रदर्शन करने में बढ़ – चढ़कर हिस्सा ले रहें हैं। यदि उनसे उनकी जिम्मेदारियों के विषय में पूछा जाये तो उनमे से अधिकांश को चुप होना पड़ेगा। क्या हम बच्चों का भविष्य ऐसा ( भ्रमित ) चाहते हैं ? lockdown

2. बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पढ़ने के लिए प्रेरित करें- lockdown

यहां पर पढ़ने का तात्पर्य जो स्कूल समय में पढ़ाया -लिखाया जाता है , उससे नहीं है l यहाँ पढ़ने का मतलब पुस्तक लेकर शब्दों को पढ़ना, वाक्यों को पढ़ना, पैराग्राफ पढ़ने से है।

यदि हम भारत में स्कूलों की बात करें, ट्यूशन की बात करें या टीचिंग या पढ़ाई की बात करें, तो रीडिंग (पढ़ने ) पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। जबकि यदि हम रिसर्च (अनुसंधानों ) पर ध्यान दें तो हम पाएंगे कि पढ़ने से, मस्तिष्क का विकास सबसे जल्दी होता है।

जिस प्रकार शारीरिक व्यायाम शरीर के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार यदि हमें मस्तिष्क को स्वस्थ और अच्छे विचारों से युक्त रखना है तो हमें अच्छी पुस्तकें पढ़ना अति आवश्यक हो जाता है। यहां पर एक सवाल आता है कि हम तो बच्चों को पढ़ने के लिए कहते हैं, लेकिन वह पढ़ते ही नहीं। हम जिस प्रकार का माहौल घर में बना करके रखते हैं उसी प्रकार के माहौल में बच्चा किसी भी कार्य को करने के लिए प्रेरित होगा lयदि घर का माहौल शांत और पढ़ने के लिए उपयुक्त नहीं है, तो भूल जाइए कि बच्चा पढ़ेगा।

रिसर्च यह दावा करती हैं कि जिन अभिभावकों को पढ़ने की ज्यादा आदत थी उन्हें पढ़ता हुआ देख कर उनके बच्चे भी पढ़ने में रुचि लेते हैं।

यदि हम अपने कामों में व्यस्त हैं, तो कम से कम हम इस प्रकार का माहौल तो बच्चों को दें, कि वह शांत चित्त होकर के पढ़ सकें। यदि हमारे पास पुस्तकें नहीं है तो हम बच्चों को मोबाइल में भी पुस्तकें डाउनलोड करके पढ़ने दे सकते हैं लेकिन इस चीज का ध्यान रखें कि उसका रीडिंग मोड (रीडिंग मोड , डार्क मोड ) आप जरूर ऑन रखें क्योंकि बच्चों की आंखों पर विपरीत असर पड़ सकता है।

3. बच्चों से घर पर अनुपयोगी (unused) सामानों से प्रोजेक्ट बनाने को कहें -lockdown

यदि हम रिसर्च पर ध्यान दें तो हम पाएंगे कि विश्व भर में जिस देश ने भी प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग पर ध्यान दिया है उस देश के बच्चे आगे जाकर बहुत सफल हुए हैं। यदि बच्चे किसी प्रोजेक्ट में व्यस्त रहते हैं, तो लंबे समय तक उनका मस्तिष्क प्लानिंग करने, सोचने और कार्य को अंतिम रूप देने में व्यस्त रहता है l ऐसा करने से मस्तिष्क अपनी उच्च क्षमता पर कार्य कर रहा होता है क्योंकि उसे यह लंबे समय तक करना है, इसीलिए ज्यादा से ज्यादा मस्तिष्क का उपयोग होता रहता है।

यदि हम अपने व्यापार, नौकरी या अपने किसी भी काम जो हम आजकल करते हैं,उस पर ध्यान दें तो हम पाएंगे कि हमें भी किसी ना किसी प्रोजेक्ट पर काम करना ही पड़ता है। मैं आपसे बच्चों से किस प्रकार प्रोजेक्ट बेस्ड (Project Based learning) काम दिया जा सकता है उससे संबंधित कुछ लिंक शेयर कर रहा हूँ-

Link 1– Arvind Gupta Toys

Link 2- DIY projects

इस प्रकार इन 3 तरीकों से हम अपने बच्चों को घर में व्यस्त रख सकते हैं और उनके कौशल में सुधार कर सकते हैं।

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों का मन बहुत चंचल होने के कारण एक ही काम में अधिक समय तक नहीं लगा रह पाता,इसीलिए जो बच्चे मेडिटेशन करते हैं उनकी लंबे समय तक काम करने की संभावना बढ़ जाती है।

इसीलिए रोज कुछ समय तक मेडिटेशन करना भी बहुत आवश्यक है l यदि हमारा या बच्चों का मन अशांत है तो किसी भी उपाय से फायदा बहुत कम या नहीं के बराबर ही मिल पाएगा।

………आशा है आपको इस ब्लॉग से लाभ अवश्य होगा।

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