हम एक तनावपूर्ण और तेजी से बदलती हुई  दुनिया में रह रहे हैं , यही वजह है कि हमें हमारे बच्चों में भावनात्मक और मानसिक दृढ़ता को बनाना या बढ़ावा देना आजकल हमारे लिए कम  महत्वपूर्ण (व्यस्तता की वजह से ) है।  Parenting Hindi

अध्ययनों में पाया गया है कि मानसिक रूप से मजबूत बच्चे न केवल बेहतर भविष्य की समस्याओं से निपटने के लिए तैयार रहतें हैं, बल्कि  वे स्कूल में और अपनी भविष्य की नौकरियों में सफल  होने की अधिक संभावना रखते हैं।

माता-पिता के लिए आजकल यह यह आसान नहीं होगा, लेकिन  कुछ टिप्स से इन सामान्य गलतियों से बचने में मदद मिल सकती है।

1. अपने बच्चे की भावनाओं को व्यक्त न करने देना या दबाना।

बच्चों को यह जानना होगा कि अपनी भावनाओं को  व्यक्त करना और उसके बारे में बात करना एक अच्छी बात है। जब माता-पिता अपने बच्चों से ऐसी बातें करतें हैं , जैसे “इसमें इतनी टेंशन वाली क्या बात है ?” या “यह बहुत बड़ी बात नहीं है,” तो वे बच्चों से यह कहना चाहतें हैं कि भावनाएं मायने नहीं रखती हैं और यह उन्हें  इसे कण्ट्रोल करने की जरुरत  है।

यदि आपका बच्चा ज़ोर से तूफान के दौरान भय के भाव प्रदर्शित कर रहा है, उदाहरण के लिए, यह कहते हुए, “मुझे डर लग रहा  हैं।” फिर हम उनसे पूछ सकतें हैं कि उन्हें क्या लगता है जिससे वे इस स्थिति में बेहतर महसूस कर सकतें हैं। यह उन्हें सिखाता है कि भावनाओं को कैसे शांत  करें और उनका अपने दम पर सामना करने का अभ्यास करें ।

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पॉइंट  यह है कि जब तक वे कुछ सोचने का काम नहीं करेंगे , तब तक बच्चों को अपनी भावनाओं पर कण्ट्रोल करना कैसे आएगा ? Parenting Hindi

2. उन्हें हमेशा असफल होने से बचाना

माता-पिता के रूप में, हम अपने  बच्चों को उन चुनौतियों से जूझते देखना नहीं चाहते है जिन्हें हम उनके लिए आसानी से solve कर सकते हैं।

लेकिन इसे इस तरह से सोचें: यदि आपका बच्चा स्कूल में खराब प्रदर्शन कर रहा है, तो आप जानते हैं कि उन्हें होमवर्क के उत्तर बताना केवल नुकसान करने वाला  होगा, क्योंकि आप कक्षा में तब नहीं रह सकते जब आपका बच्चा  उस टॉपिक पर एग्जाम  दे रहा  होगा।

असफल होने से बचाना

असफलता, सफलता का एक बड़ा हिस्सा है। यदि बच्चों को कभी असफलता के पीछे छुपा सबक सीखने का मौका नहीं दिया जाता है, तो वे कभी भी उस दृढ़ता या इच्छाशक्ति को विकसित नहीं कर सकते  हैं जो उन्हें एक झटके के बाद उठने की आदत (बाउंस बैक करना) सिखाये। Parenting Hindi

3. अपने बच्चों को हमेशा उनका मनपसंद सामान देना

बच्चों को मनपसंद सामान हमेशा चाहिए, और माता-पिता उन्हें देना भी पसंद करते हैं। लेकिन शोध से पता चलता है कि जब आप अपने बच्चों को जो कुछ भी देते हैं, वे आत्म-अनुशासन जैसे मानसिक शक्ति से संबंधित कौशल को  नहीं  सीख पातें हैं।

यदि आप चाहते हैं की बच्चे किसी चीज का महत्व समझें , तो बचपन से ही आप उनके लिए जो भी सामान ख़रीदे या दें तो उन्हें यह महसूस करवाए, “क्योंकि आपने (बच्चे ने ) अपना काम ख़त्म कर लिया है, इसलिए आपको (बच्चे को ) यह सामान दिया जा रहा है। Parenting Hindi

उनका मनपसंद सामान देना

ऐसा करने से हम बच्चों में जिम्मेदारी की आदतें बना सकतें हैं। 

4. उन्हें परफेक्ट बनाने की अपेक्षा करना

अपने बच्चे को बड़े लक्ष्यों के लिए तैयार करना और हर चीज में सर्वश्रेष्ठ होने की अपेक्षा करना स्वाभाविक है। लेकिन यह नहीं है कि चीजें कैसे काम करती हैं। अपनी उम्मीदों को बहुत ऊंचा करने से बच्चों के जीवन में बाद में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की समस्या पैदा हो सकती है। Parenting Hindi

यह अपने बच्चों को बताएं कि आप यथार्थवादी हैं, अपने बच्चों में मानसिक शक्ति का निर्माण और विकास  करें। और उन्हें अपनी समस्याओं से लड़ने के लिए प्रेरित करें यहां तक ​​कि अगर आपके बच्चे शुरुआत में सफल नहीं हो पा रहें हैं, तब भी उनके सामने आने वाली छोटी – छोटी असफलताएं  उन्हें कभी भी जीवन का मूल्यवान  सबक सीखा सकती हैं  और अगली बार  सफल होने के लिए तैयार कर सकती हैं ।

5. अपने बच्चों को कम्फर्ट जोन में रखना

कई चीजें हैं जो आपके बच्चे को असहज लग सकती हैं, खासकर वे कुछ नया करने की कोशिश करते हैं, जैसे : नए खाद्य पदार्थों को try करना  , नए दोस्त बनाना, एक नया खेल खेलना और एक नए स्कूल में जाना।

लेकिन असफलता की तरह, असहज क्षणों को गले लगाने से मानसिक ताकत बढ़ सकती है। अपने बच्चों को नई चीजों को आजमाने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें आरंभ करने में सहायता करें, क्योंकि वह सबसे कठिन हिस्सा है।

लेकिन एक बार जब वे पहला कदम उठाते हैं, तो उन्हें एहसास हो सकता है कि यह उतना मुश्किल नहीं है जितना उन्होंने सोचा था कि यह हो सकता है – और यह भी कि वे इसमें बहुत अच्छा कर सकतें हैं।

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